मूषक पर होकर सवार

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

मूषक पर होकर सवार, देवा घर घर आये है आज,

सारे शहर मे खुशियों है छाई, आये हैं आज गणपति महाराज,

जय गणेश जय गणेश जय जय गणराज......

एक दन्त दयावन्त की मूषक है सवारी,

जाकी माता पार्वती और पिता त्रिपुरारी,

माथे सिंदूर शोभित सग विद्याधन भारी,

कृपा करो हम सब पर चार भुजा धारी,

सारी विघ्न दूर करो, हे गणपति महाराज.....

मोदक चढ़े फूल चढ़े और चढ़े हार,

गणपति बप्पा की हो रही जय जयकार,

ढोल बजे शंक बजे झन झन झंकार,

विनती विनम्र हमसब करो स्वीकार,

हरेक वर्ष विराजै गणेश,

और हम बजाए साज......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।