आओ बाईसा थाने आज बुलावे (धमाल )

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - धमाल

आओ बाईसा थाने आज बुलावे बाबोसा परिवार, आओ बाईसा,

मन मंदिर में लेके पधारो, बाबोसा ने लार, आओ बाईसा,

आओ बाईसा थाने आज बुलावे.......

धणा दीना सु थारी ओल्यू आवे, हिचकी रुक न पावे जी,

रात भर म्हाने नींद न आवे, एक नही कई बार, आओ बाईसा,

आओ बाईसा थाने आज बुलावे.......

रिमझिम बरसे सावन जय्या, बरस रहिया म्हारा नैन जी,

था बिन एक पल चेन न आवे, सुणलो म्हारी पुकार, आओ बाईसा,

आओ बाईसा थाने आज बुलावे.......

सांची प्रीत या थांसु बांधी, टूटे न यो बंधन जी,

थे ही जाणो म्हारे मन की, जाणे न संसार, आओ बाईसा,

आओ बाईसा थाने आज बुलावे.......

बाईसा जद आप पधारो, काम सभी बन जावे जी,

बाबोसा भी आवे संग में, हम भगतो के द्वार, आओ बाईसा,

आओ बाईसा थाने आज बुलावे.......

बाईसा रे सागे आया, बाबोसा सरकार जी,

"दिलबर" अभिलाषा हुई पूरी, छाई खुशी अपार, आया बाईसा,

आया बाईसा हर्षित है देखो बाबोसा परिवार, आया बाईसा,

बाबोसा ने सागे लाया, नही भूला थारो उपकार, आया बाईसा,

हो... आया बाईसा... हो आया बाबोसा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।