ओ बाबोसा मेरे भगवन तेरा हरपल शुकर करूँ मैं

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - तुझे सूरज कहुँ या चंदा

जब सर पे हाथ है तेरा, तेरे होते क्यो फिकर करूँ मैं,

श्री बाबोसा मेरे भगवन, तेरा हरपल शुकर करूँ मैं....

धन दौलत का क्या करना, जब मिल गया तेरा शरणा,

अब ओर भला क्या मांगु, बिन मांगे दिया तूने इतना,

अब रात दिन बाबोसा, बस तेरा ही जिकर करू मैं,

श्री बाबोसा मेरे भगवन, तेरा हरपल शुकर करूँ मैं,

जब सर पे हाथ है तेरा....

गर कृपा तेरी न होती, तो मन में न जलती ज्योति,

पत्थर ही रह जाता मैं, न बनता कभी भी मोती,

तेरे साये में बाबोसा, ये जीवन बसर करूँ मैं,

श्री बाबोसा मेरे भगवन, तेरा हरपल शुकर करूँ मैं,

जब सर पे हाथ है तेरा....

यही आरजू मेरी "दिलबर" जब भी मेरा जनम हो,

तेरे नाम से ही ये शुरू हो, तेरे नाम पे ही ये खतम हो,

यही कहती है ये रिया, तेरा दिल से ध्यान धरु मैं,

श्री बाबोसा मेरे भगवन, तेरा हरपल शुकर करूँ मैं,

जब सर पे हाथ है तेरा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।