मेरे दिल दियां तुही जाने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे दिल दिया तुही जाने जाने न कोई संवारे,

मेरे दिल विच तुही वसदा वसे न कोई होर संवारे,

तेरी ठोढ़ी ते काला काला तिल वे,

मेरे दिल विच बसे तेरा दिल वे,

तुही मेरी जान संवारे,

मेरे दिल दियां तुही जाने............

तेरी बंसी दी धुन बड़ी प्यारी,

सारी जिन्दरी वी दावा एथो वारी,

तेरे नाल प्यार संवारे,

मेनू जाने ता तुही .........

तेनु वेख वेख इतरावे मन झूम झूम के गावे,

मन होर न किधरे जावे के तुही मेरा परान संवारे,

मेनू पावे ता तुही एक पावे न पावे कोई होर संवारे,

मेरे दिल दियां तुही.........

संग सखिया दे तुही नाचदा,कोई भेद भाव नही रखदा,

तेरी रसा तो जावा वारी वारी,

के तुही मेरा मीत संवारे,

तुही सब्दा बने इस जग ते बने न कोई होर संवारे,

मेरे दिल दियां तुही जाने............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।