जग में न कोई साँचा माँ तू ही है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ मेरी शेरावाली है माँ मेरी ज्योतावाली है,

दर्शन दे दो माँ यही अर्जी है,

जग में ना कोई साँचा माँ तुही है,

माँ मेरी शेरावाली है माँ मेरी ज्योतावाली है,

दर्शन दे दो माँ यही अर्जी है,

जग में ना कोई साँचा माँ तुही है......

भर दे मेरी झोली जैसे भरती है सबकी,

सुना है अपने भक्तो में फर्क नहीं माँ तू करती,

निर्धन हो या मैया चाहे धनवान,

निर्बल हो या मैया चाहे बलवान हो,

तेरी ममता तो सभी पाते है,

जग में ना कोई साँचा माँ तुही है……

सूरज चाँद सितारे उजियारे तुम्ही से पाते,

इन फूलो की बागियों में रंग खुशबु तुम्ही से आते,

सब जीवो की जननी तुम ही आदि शक्ति,

तर जाता वो प्राणी जो करे तेरी भक्ति,

तू ही गौरी है महाकाली है,

जग में ना कोई साँचा माँ तुही है......

दुनिया ने ठुकराया बस तुम ही से है मेरा नाता,

जो तुमने भी माँ ठुकराया तो जाउंगी मै कहाँ माँ,

भव सागर मैया मेरी नैया डूब रही बन जाओ,

खिवैया माँ तुमसे ही आस मेरी,

डूब ना जाऊं हाथ पकड़ लो माँ,

जग में ना कोई साँचा माँ तुही है,

माँ मेरी शेरावाली है माँ मेरी ज्योतावाली है,

दर्शन दे दो माँ यही अर्जी है,

जग में ना कोई साँचा माँ तुही है……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।