कान्हा थामे है राधा की बैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा थामे है राधा की बैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

कान्हा थामे है राधा की बैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया.....

झूमे धरती गगन चूमे देखो कदम,

राधा रानी की ये पुरवइया,

झूमे धरती गगन चूमे देखो कदम,

राधा रानी की ये पुरवइया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

कान्हा थामे है राधा की बैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया.......

आज गोकुल में मस्ती है छाई,

झूला झूलन की बेला है आई,

आज गोकुल में मस्ती है छाई,

झूला झूलन की बेला है आई,

तान छेड़े है बंसी बजैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

कान्हा थामे है राधा की बैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया.......

बांधी चांदी के पाटे में डोरी,

बैठी झूले के आसन पे गौरी,

बांधी चांदी के पाटे में डोरी,

बैठी झूले के आसन पे गौरी,

होले होले झुलावे कन्हैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

कान्हा थामे है राधा की बैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया.......

आज सावन के झूले सजें हैं,

कान्हा राधा संग रास रचें हैं,

आज सावन के झूले सजे हैं,

कान्हा राधा संग रास रचें हैं,

रास घलवाये रास रचैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

कान्हा थामे है राधा की बैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया.......

हर्ष सावन की बरसे बदरिया,

देखो राधा की भीगे चुनरिया,

हर्ष सावन की बरसे बदरिया,

देखो राधा की भीगे चुनरिया,

लेवे लेवे रे सखियां बलैयां,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

कान्हा थामे है राधा की बैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया,

झूला झूले रे राधा कन्हैया........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।