मुझे माँ की कृपा मिल गई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय माँ जय माँ जय जय माँ

मुझे माँ की किरपा, मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा, मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई,

मुझको ऐसी मिली कृपा की जिसे देख के दुनिया जल गई,

मुझे माँ की किरपा मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई......

शरणगत हुयी कीर्ति बखानी जय जय जगदम्ब भवानी,

जय जय जगदम्ब भवानी,

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा दई शक्ति नहीं कीन्ह विलम्बा,

दई शक्ति नहीं कीन्ह विलम्बा,

शरणगत हुयी कीर्ति बखानी जय जय जगदम्ब भवानी,

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा दई शक्ति नहीं कीन्ह विलम्बा,

सच कहता हूँ झूठ नहीं मुझ पे जादू कर गई,

मुझे माँ की किरपा मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई......

शुम्भ निसुम्भ दानव तू मारे रक्तबीज से दानव संघारे,

रक्तबीज से दानव संघारे,

महिषासुर नृप अति अभिमानी जेही अघ भार माही अकुलानी,

जेही अघ भार माही अकुलानी,

शुम्भ निसुम्भ दानव तू मारे रक्तबीज से दानव संघारे,

महिषासुर नृप अति अभिमानी जेही अघ भार माही अकुलानी,

कृपा है ये बड़े काम की सब पर कृपा कर गई,

मुझे माँ की किरपा मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई......

शत्रु नाश कीजे महारानी सुमिरो एकचित तुम्हे भवानी,

सुमिरो एकचित तुम्हे भवानी,

करो कृपा हे माता दयाला रिद्धि सिद्धि से करो निहाला,

रिद्धि सिद्धि से करो निहाला,

शत्रु नाश कीजे महारानी सुमिरो एकचित तुम्हे भवानी,

करो कृपा हे माता दयाला रिद्धि सिद्धि से करो निहाला,

देवेंद्र बन आया भिखारी किरपा उसको मिल गई,

मुझे माँ की किरपा मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मुझे माँ की किरपा,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई,

मुझे माँ की किरपा मिल गई, ये बड़ी भागय से मिल गई......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।