ऊँचे पहाड़ों वाली मैया आई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ शेरावाली माँ ज्योतावाली माँ मेहरावाली माँ,

ऊँचे पहाड़ो वाली मैया आई है,

ऊँचे पहाड़ो वाली मैया आई है,

नवराते में खुशियों की बरसात छायी है,

नवराते में खुशियों की बरसात छायी है,

ऊँचे पहाड़ो वाली मैया आई है,

ऊँचे पहाड़ो वाली मैया आई है,

नौराते में कृपा की बरसात लाई है,

नौराते में कृपा की बरसात लाई है.......

मैया के स्वागत में फूलो से एक द्वार सजायेंगे,

मैया के स्वागत में फूलो से एक द्वार सजायेंगे,

देवेंद्र ढोल तासे सतेंद्र शहनाई बजायेंगे,

देवेंद्र ढोल तासे सतेंद्र शहनाई बजायेंगे,

जय माता की सुन्दर आवाज लगाईं है,

जय माता की सुन्दर आवाज लगाईं है,

नौराते में कृपा की बरसात लाई है,

नौराते में कृपा की बरसात लाई है.......

सातो बहिन संग मैया रानी जी आई है,

सातो बहिन संग मैया रानी जी आई है,

साथ अपने भैरो भैया जी को लाइ है,

साथ अपने भैरो भैया जी को लाइ है,

गुरु बृजमोहन ने भी माँ की महिमा गाई है,

गुरु बृजमोहन ने भी माँ की महिमा गाई है,

नौराते में कृपा की बरसात लाई है,

नौराते में कृपा की बरसात लाई है,

ऊँचे पहाड़ो वाली मैया आई है,

ऊँचे पहाड़ो वाली मैया आई है,

नवराते में खुशियों की बरसात छायी है,

नवराते में खुशियों की बरसात छायी है,

नौराते में कृपा की बरसात लाई है,

नौराते में कृपा की बरसात लाई है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।