मुझको नंदी बना ले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मुझको नंदी बना ले,

मुझको नंदी बना ले,

अपना संगी बना ले,

अपना बंधी बना ले मेरे भोले,

मुझको नंदी बना ले,

अपना संगी बना ले,

अपना बंधी बना ले मेरे भोले....

तेरी दरश का प्यासा भोले मन से हूं मैं मैला,

कल कल थल थल बहता जौ साथ मिले जो तेरा,

तेरी दरश का प्यासा भोले मन से हूं मैं मैला,

कल कल थल थल बहता जौ साथ मिले जो तेरा,

मुझको गंगा बना ले अपनी जट्टा में बस ले,

मन के पाप तू मिटा दे मेरे भोले....

मुझको नंदी बना ले,

अपना संगी बना ले,

अपना बंधी बना ले मेरे भोले...

तेरी धुन में घूम रहा मैं दुनिया से अंजाना,

तेरा नाम बस अपना लगे बाकी सब बेंगा,

तेरी धुन में घूम रहा मैं दुनिया से अंजाना,

तेरा नाम बस अपना लगे बाकी सब बेंगा,

मुझको डमरू बना ले भोले बांध बांध बजा दे,

सारी दुनिया नचा दे मेरे भोले....

मुझको नंदी बना ले,

अपना संगी बना ले,

अपना बंधी बना ले मेरे भोले...

हाथ पकड़ा ले भोले मेरा भवसागर तर जौ,

तेरी भक्ति करते करते मुक्ति मैं पा जौ,

हाथ पकड़ा ले भोले मेरा भवसागर तर जौ,

तेरी भक्ति करते करते मुक्ति मैं पा जौ,

मुझको भस्म बना ले भोले अनग से लगा ले,

मन अघोरी बना दे मेरे भोले....

मुझको नंदी बना ले,

अपना संगी बना ले,

अपना बंधी बना ले मेरे भोले....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।