मै रम गया तेरी काशी में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मै रम गया तेरी काशी में,

मैं रम गया तेरी काशी में,

मन साधु हुआ,

मन साधु हुआ,

बन गया सन्यासी मै,

मैं रम गया तेरी काशी में......

जो आनंद है तेरे घाटों में,

माथा झुकता है,

काशी कपाटों में,

वैरागी हुआ,

वैरागी हुआ,

जो प्रीत लगी अविनाशी में,

मैं रम गया तेरी काशी में.....

मन साधु हुआ,

मन साधु हुआ,

बन गया सन्यासी मै,

मैं रम गया तेरी काशी में.....

छोड़े महल ये रेशमी धागों के,

नींदे मीठी हैं, गंगा के घाटो में,

मल्हारी हुआ,

मल्हारी हुआ,

मैं रम गया चौरासी में....

मै रम गया तेरी काशी में....

मन साधु हुआ,

मन साधु हुआ,

बन गया सन्यासी मै.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।