ॐ शम्भो शंकर नमः शिवाय

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ॐ शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

ॐ नमः शिवाय ॐ नम शिवाय,

हर हर भोले नमः शिवाय

रामेश्वराय शिव रामेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

रामेश्वराय शिव रामेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

गंगाधाराय शिव गंगाधाराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

गंगाधाराय शिव गंगाधाराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय......

जटाधराय शिव जटाधाराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

सोमेश्वराय शिव सोमेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय......

विश्वेश्वराय शिव विश्वेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

कोटेश्वराय शिव कोटेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय……..

महाकालेश्वराय महाकालेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

त्रम्भकेशवराय शिव त्रम्भकेशवराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय.......

ॐ शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

ॐ नमः शिवाय ॐ नम शिवाय,

हर हर भोले नमः शिवाय

रामेश्वराय शिव रामेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

रामेश्वराय शिव रामेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

गंगाधाराय शिव गंगाधाराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

गंगाधाराय शिव गंगाधाराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय.......

जटाधराय शिव जटाधाराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

सोमेश्वराय शिव सोमेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय.......

विश्वेश्वराय शिव विश्वेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

कोटेश्वराय शिव कोटेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय……..

महाकालेश्वराय महाकालेश्वराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

त्रम्भकेशवराय शिव त्रम्भकेशवराय,

हर हर भोले नमः शिवाय,

शम्भो शंकर नमः शिवाय

गिरिजा शंकर नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।