ले चल री गौरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

वृंदावन जाने की,

मेरे मन में आई है,

चल ले चल री गौरा,

वहां दुनिया जा रही है,

चल ले चल री गौरा,

वहां दुनिया जा रही है.......

वहां नर नहीं जाते हैं,

वहां नारी जाती हैं,

मेरी नारी बनने की,

मेरे मन में आई है,

चल ले चल री गौरा,

वहां दुनिया जा रही है……

वहां डमरु नहीं बजता,

वहां मुरली बजती है,

मेरे मुरली सुनने की,

बड़ी मन में आ रही है,

चल ले चल री गौरा,

वहां दुनिया जा रही है……..

वहां भांग नहीं मिलती,

माखन मिलता है,

मेरे माखन खाने की,

बड़ी मन में आ रही है,

चल ले चल री गौरा,

वहां दुनिया जा रही है…….

वहां तांडव नहीं होता,

वहां रास होता है,

मेरे रास देखने की,

बड़ी मन में आ रही है,

चल ले चल री गौरा,

वहां दुनिया जा रही है……

वृंदावन जाने की,

मेरे मन में आई है,

चल ले चल री गौरा,

वहां दुनिया जा रही है,

चल ले चल री गौरा,

वहां दुनिया जा रही है…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।