शिवजी के डमरू से निकला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिवजी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,

शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,

नारद की वीणा से निकला पतित पावन सीताराम,

शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम…..

अर्जुन के गाँढिव से निकला जय मधुसुधन जय घनश्याम,

द्रोपदी की आह से निकला भक्त के रक्षक हे भगवान,

शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम….

शबरी के बैरो से निकला भाव के भूखे हे भगवान,

भक्त प्रहलाद के मुख से निकला तुझमें राम मुझमें राम,

शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम…

बृज की कुंज गली से निकला जय गुरुदाता जय गुरुनाम,

चार वेद छः शास्त्र पुकारे हरि ओम हरि ओम सीताराम,

शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम…..

शंकर के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,

शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम,

नारद की वीणा से निकला पतित पावन सीताराम,

शिव जी के डमरू से निकला रघुपति राघव राजा राम…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।