गौरा ढूंढ रही किसी ने मेरा भोला देखा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरा ढूंढ रही किसी ने मेरा भोला देखा,

किसी ने मेरा भोला देखा, किसी ने मेरा भोला देखा…….

गौरा तेरे भोला को काशी में देखा

काशी में देखा, काशी में देखा,

भांग चबाते हुए,

ओ गौरा तेरे भोला को देखा,

गौरा ढूँढ रहीं किसी ने मेरा भोला देखा…….

गौरा तेरे भोला को हरिद्वार में देखा,

हरिद्वार में देखा, हरिद्वार में देखा,

गंगा बहाते हुए,

ओ गौरा तेरे भोला को देखा,

गौरा ढूँढ रहीं किसी ने मेरा भोला देखा………

गौरा तेरे भोला को प्रयाग में देखा,

प्रयाग में देखा, प्रयाग में देखा,

डमरू बजाते हुए,

ओ गौरा तेरे भोला को देखा,

गौरा ढूँढ रहीं किसी ने मेरा भोला देखा…….

गौरा तेरे भोला को कैलाश में देखा,

कैलाश में देखा, कैलाश में देखा,

समाधी में लीन हुए,

ओ गौरा तेरे भोला को देखा,

गौरा ढूँढ रहीं किसी ने मेरा भोला देखा…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।