राम हृदय में रट के

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सीता पढ़न चली छठसाल राम हृदय में रट के,

राम हृदय मे रट के हरि जी हृदय में धर के,

सीता पढ़न चली छठसाल....

रास्ते में एक बाबा मिल गए,

बाबा देखो मेरो हाथ, हाथ की रेखा कैसी हैं,

हाथ की रेखा कैसी हैं कर्म की रेखा कैसी हैं,

सीता पढ़न चली छठ साल.....

सोलह बरस बेटी राज करोगी,

बेटी बारह बरस वनवास, हाथ की रेखा ऐसी हैं,

सीता पढ़न चली छठ साल.....

कौन संग बाबा राज करूंगी,

बाबा कौन संग बनवास, हाथ की रेखा कैसी हैं,

सीता पढ़न चली छठ साल.....

पिता संग बेटी राज करोगी,

बेटी पति संग बनवास, हाथ की रेखा ऐसी हैं,

सीता पढ़न चली छठ साल.....

तपशीन को बेटी रूप धरोगी,

बेटी दोनों कुलों की रखो लाज, हाथ की रेखा ऐसी हैं,

सीता पढ़न चली छठ साल.....

धीर वीर बेटी पुत्र जनोगी,

बेटी पले ऋषि मुनि साथ, हाथ की रेखा ऐसी हैं,

सीता पढ़न चली छठ साल.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।