भवन मैया के जाऊंगी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बलम तेरी एक ना मानूंगी भवन मैया के जाऊंगी....

जेब में एक नहीं धेला,

नार तोहै सूज रहो मेला,

मैं तगड़ी बेच कर जाऊंगी, भवन मैया के जाऊंगी.....

बहती बाण गंगा है वहा का पानी ठंडा है,

नार तोसे नाहायो ना जयगो,

मैं गोते खूब लगाऊंगी, भवन मैया के जाऊंगी....

वहां की कठिन चढ़ाई है,

नार तोसे चढ़ा ना उतरो जाए,

बैठ पिट्ठू पर जाऊंगी, भवन मैया के जाऊंगी....

वहां की गर्भ जून भारी,

नार तोसे बड़ौ ना निकलो जाए,

पेट बल सरक के जाऊंगी, भवन मैया के जाऊंगी.....

भवन पर भीड़ बड़ी भारी,

नार तोसे दर्शन ना होंगे,

मैं नारियल भेंट चढ़ाऊंगी, भवन मैया के जाऊंगी....

चैत के आए नवरात्रे,

नार हम दोनों ही जाएंगे,

मैं भक्तों के साथ में जाऊंगी, भवन मैया के जाऊंगी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।