अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले,

प्यारे मुरलिया वाले मोर मुकुट वाले,

अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले.....

ब्रह्मा भी तरसे विष्णु भी तरसे,

तरसे है शंकर प्यारे मुरलिया वाले,

अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले.....

रामा भी तरसे लक्ष्मण भी तरसे,

तरसे है हनुमत प्यारे मुरलिया वाले,

अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले.....

गंगा भी तरसे जमुना भी तरसे,

तरसे है नदिया नाले मुरलिया वाले,

अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले.....

चंदा भी तरसे सूरज भी तरसे,

तरसे है नो लखा तारे मुरलिया वाले,

अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले.....

गैया भी तरसे बछड़ा भी तरसे,

तरसे है ग्वाला बिचारे मुरलिया वाले,

अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले.....

ऋषि मुनि और संत भी तरसे,

तरसे है भक्त विचारे मुरलिया वाले,

अब तुम रथ को रोको मुरलिया वाले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।