सिया तो राजा राम की हुई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

ले लो ले लो रे जनक जी कन्यादान,

सिया तो राजा राम की हुई....

बड़े भाग हैं जनक तुम्हारे रघुवर मिले जमाई,

रूपवान गुणवान बहुत इनमें मुनी के यज्ञ बचाई,

अपने भक्तों का बचाते हरदम मान,

सिया तो राजा राम की हुई....

समय तुल्य समझी तुम पाए कहां तक करूं बढ़ाई,

इंद्रदेव की दशरथ जी ने रण में करी बढ़ाई,

ऐसे काहू को मिले ना मेहमान,

सिया तो राजा राम की हुई....

राम लक्ष्मण और भरत शत्रुघ्न सुंदर चारों भाई,

चार सुता है जनक तुम्हारे इनको देओ बिहाई,

तुमरो सब विधि से भयो रे कल्याण,

सिया तो राजा राम की हुई....

गुरु की आज्ञा मान जनक ने मंडप दिया कढ़ाई,

सखिया मंगल गाने लागी सिया राम को बिहाई,

समाधि समधि का बढ़ाते हरदम मान,

सिया तो राजा राम की हुई....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।