बाबा आज भी मेरे दिल में आप बिराज रहे

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा आज भी मेरे दिल में आप बिराज रहे,

चंदा सूरज जैसे चमकते ऐसे राज रहे,

बाबा आज भी मेरे दिल में आप बिराज रहे.....

ना ही सूरत ना कोई मूरत,

ना कोई दिल को रही ज़रूरत,

रग रग रास रहे,

आज भी मेरे दिल में आप बिराज रहे......

हर एक पल पल हर एक क्षण क्षण,

चरणों में तेरे रहता मेरा मन,

साँसों में साज रहे,

आज भी मेरे दिल में आप बिराज रहे....

हाथों में तेरे हाथ है मेरा,

अंग संग हर दम साथ है तेरा,

ये विश्वास रहे,

आज भी मेरे दिल में आप बिराज रहे.....

रस का हो बादल या रस का पागल,

चरणों की तेरे गोपाली पायल,

तू सर का ताज रहे,

आज भी मेरे दिल में आप बिराज रहे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।