कान्हा तेरी नजर बुरी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा तेरी नजर बुरी है वह नजर लगी है,

ऐसी क्या तू हूर की परी है तो है नजर लगी है.....

ऊपर ली में क्या है निचरली में क्या है,

बीज कि मैं क्या कुछ भरी है तो है नजर लगी है.....

ऊपर ली में माखन निचरली में मिश्री,

बीच में रतन दही है मोह नजर लगी है.....

कहां से आवे माखन कहां से आवे मिश्री,

कहां से रतन दही है तो है नजर लगी है......

गोकुल से आवे माखन दाऊजी से मिश्री,

वृंदावन से रतन दही है मोह नजर लगी है.....

कौन खावे माखन फोन खावे मिश्री,

कौन खावे रतन दही है तो है नजर लगी है....

ग्वाला खाने माखन दाऊ खावे मिश्री,

कान्हा खावे रतन दही है मोह नजर लगी है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।