मैया आओ मोरे अँगना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जो भी तेरे दर पे आता होती मुरादे पूरी,

आज मै तेरे दर पे आया दे दो वर माँ त्रिपुर सुंदरी,

खेलत भाव मैया आओ मोरे अंगना कर दो दया महरानी माँ,

तुम दया की देवी हो मोरी मैया दया की देवी हो मोरी मैया......

सुन्दर आँगन चौक पुराये चन्दन चौकी बिछाई माँ,

चन्दन चौकी बिछाई माँ चन्दन चौकी बिछाई माँ,

कंचन थाल कपूर की बाती जगमग ज्योत जलाई माँ,

जगमग ज्योत जलाई माँ जगमग ज्योत जलाई माँ,

खेलत भाव मैया आओ मोरे अंगना कर दो दया महरानी माँ,

तुम दया की देवी हो मोरी मैया दया की देवी हो मोरी मैया......

कन्या रूप रखो महारानी सखियों संग चली आओ माँ मैया,

सखियों संग चली आओ माँ मैया सखियों संग चली आओ माँ मैया,

छन छन पायल छनकाती ठुमक ठुमक चली आओ माँ मैया,

ठुमक ठुमक चली आओ माँ मैया ठुमक ठुमक चली आओ माँ मैया,

खेलत भाव मैया आओ मोरे अंगना कर दो दया महरानी माँ,

तुम दया की देवी हो मोरी मैया दया की देवी हो मोरी मैया......

अमुआ की डारि मैया चन्दन पलंगिया रेशम डोर दराई माँ,

रेशम डोर दराई माँ रेशम डोर दराई माँ,

सखियों संग मोरी मैया झूलो भक्त देख हर्षाये माँ,

भक्त देख हर्षाये माँ भक्त देख हर्षाये माँ,

खेलत भाव मैया आओ मोरे अंगना कर दो दया महरानी माँ,

तुम दया की देवी हो मोरी मैया दया की देवी हो मोरी मैया......

मार मिचकनी झूलो जग तारण आंगन पलकिया जाए मोरी मैया,

आंगन पलकिया जाए मोरी मैया आंगन पलकिया जाए मोरी मैया,

लहर लहर माँ उड़े चुनरिया अंगना शोर मचाये माँ मैया,

अंगना शोर मचाये माँ मैया अंगना शोर मचाये माँ मैया,

खेलत भाव मैया आओ मोरे अंगना कर दो दया महरानी माँ,

तुम दया की देवी हो मोरी मैया दया की देवी हो मोरी मैया......

तुम्हरे दुवारे मैया बोये ज्वारे नौ बहने संग आओ माँ मैया,

नौ बहने संग आओ माँ मैया नौ बहने संग आओ माँ मैया,

खेलत भाव मार किलकारी खप्पर ले चली आओ माँ मैया,

खप्पर ले चली आओ माँ मैया खप्पर ले चली आओ माँ मैया,

खेलत भाव मैया आओ मोरे अंगना कर दो दया महरानी माँ,

तुम दया की देवी हो मोरी मैया दया की देवी हो मोरी मैया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।