कन्या है रूप महामाई का

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय माँ जय जय माँ जय जय माँ,

जय जय माँ अम्बे माँ जय जय माँ अम्बे माँ,

जीन नजरो ने जीन नजरो ने घर में है पा लिया,

कन्या में ही है रूप मायी का,

जीन नजरो ने जीन नजरो ने घर में है पा लिया,

कन्या में ही है रूप मायी का,

पूजे कन्या को माई को रिझा लिया,

पूजे कन्या को माई को रिझा लिया कन्या में ही है रूप मायी का,

जीन नजरो ने घर में है पा लिया कन्या में ही है रूप मायी का.......

जय माँ.......

देखा नहीं माँ को पर कन्या को देखा है,

जिसने बदल दी मेरे भाग्य की रेखा है,

जय माँ जय माँ जय जय जय जय माँ,

देखा नहीं माँ को पर कन्या को देखा है,

जिसने बदल दी मेरे भाग्य की रेखा है भाग्य की रेखा है,

यही सोच से मन को मना लिया यही सोच से मन को मना लिया,

कन्या में ही है रूप मायी का,

जीन नजरो ने घर में है पा लिया कन्या में ही है रूप मायी का,

जीन नजरो ने घर में है पा लिया कन्या में ही है रूप मायी का…..

कोमल ह्रदय है लेकिन शक्ति अपार है,

इनकी ही रचना ये सारा संसार है,

जय माँ जय माँ जय जय जय जय माँ,

हाँ कोमल ह्रदय है लेकिन शक्ति अपार है,

इनकी ही रचना ये सारा संसार है सारा संसार है,

जैसा चाहा जिसे वैसा ही बना दिया,

जैसा चाहा जिसे वैसा ही बना दिया कन्या में ही है रूप मायी का,

जीन नजरो ने घर में है पा लिया कन्या में ही है रूप मायी का,

जीन नजरो ने घर में है पा लिया कन्या में ही है रूप मायी का.....

जिस घर बेटियों का होता सम्मान है,

दास वो ही घर मानो स्वर्ग समान है,

जय माँ जय माँ जय जय जय माँ,

हो जिस घर बेटियों का होता सम्मान है,

दास वो ही घर मानो स्वर्ग समान है,

स्वर्ग समान है भेद जिसने ये दिल में बसा लिया,

भेद जिसने ये दिल में बसा लिया कन्या में ही है रूप मायी का,

जीन नजरो ने घर में है पा लिया कन्या में ही है रूप मायी का.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।