मेरे प्यारे से बजरंगी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी......

जब बाला जी तोहे भूख लगेगी,

भूख लगेगी तोहे भूख लगेगी,

लडूवन को भोग लगा दूँगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

लडूवन को भोग लगा दूँगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी……..

जब बालाजी तोहे प्यास लगेगी,

जब बालाजी तोहे प्यास लगेगी,

गंगा जल नीर पिला दूंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी…….

जब बालाजी तोहे जाड़ो लगेगो,

जब बालाजी तोहे जाड़ो लगेगो,

तोहे लाल लंगोटा पहना दूंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी......

जब बालाजी तोहे गर्मी लगेगी,

जब बालाजी तोहे गर्मी लगेगी,

तुझे समुंद्र बीच नहला दूंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी.......

जब बालाजी तू मांगे रे खिलौना,

जब बालाजी तू मांगे रे खिलौना,

छोटी सी गदा दिला दूंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी……

जब बालाजी तेरो मन नहीं लाग,

जब बालाजी तेरो मन नहीं लाग,

श्री राम से तोहे मिला दूंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी…..

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी,

सूरज को मुख में न रखियो,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे छोटे से बजरंगी,

मेरे प्यारे से बजरंगी……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।