सुन ले विनती हे महारानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुन ले विनती हे महारानी,

आन पड़ी हूँ शरण तुम्हारी…..

निस दिन तेरी जोत जागो,

पल पल मैं तेरी राह निहारु,

तेरे दरस को नैना तरसे,

आँखों से आंसू मेरे बरस,

सुन ले विनती हे महारानी,

आन पड़ी हूँ शरण तुम्हारी,

सुन ले विनती हे महारानी,

आन पड़े है शरण तुम्हारी......

आज मेरी आस न टूटे,

मेरा ये विश्वास न टूटे,

लाखों की तूने बिगड़ी बनाई,

मैं दुखियारी दर पे आयी,

दर पे आयी..

सुन ले विनती हे महारानी,

आन पड़ी हूँ शरण तुम्हारी,

सुन ले विनती हे महारानी,

आन पड़े है शरण तुम्हारी…..

सारे जग के हम है सताए,

भक्त तेरे है दर पे आये,

आये है जब से शरण तुम्हारी,

हे जग जननी माँ कल्याणी,

सुन ले विनती हे महारानी,

आन पड़ी हूँ शरण तुम्हारी,

सुन ले विनती हे महारानी,

आन पड़े है शरण तुम्हारी………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।