पुजारी खोल जरा पट द्वार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पुजारी खोल जरा पट द्वार,

बंद कोठरी में बैठा है,

बंद कोठरी में बैठा मेरा,

सांवरिया सरकार,

पुजारी, खोल जरा पट द्वार,

पुजारी, ख़ोल जरा पट द्वार......

थके हुए हैं भक्त बिचारे,

मोहनी रूप दिखा दे प्यारे,

प्रेमी जन को ना बिसरा रै,

आग बरसता सूरज सिर पर,

आग बरसता सूरज सिर पर,

लम्बी लगी कतार,

पुजारी, खोल जरा पट द्वार,

पुजारी, ख़ोल जरा पट द्वार.......

निष्ठुर क्यों भक्तों को धकेले,

व्यर्थ करे झंझट ये झमेले,

भक्त बिना भगवान अकेले,

दीनानाथ की शरण पड़ा है,

दीना नाथ की शरण पड़ा है,

ये दुखिया संसार,

पुजारी, खोल जरा पट द्वार,

पुजारी, ख़ोल जरा पट द्वार......

सेवा ही अधिकार है तेरा,

मैं ठाकुर का ठाकुर मेरा,

बीच भला क्या काम है तेरा,

मंदिर कारागार नहीं है,

मंदिर कारागार नहीं है,

जिस पर तेरा अधिकार,

पुजारी, खोल जरा पट द्वार,

पुजारी, ख़ोल जरा पट द्वार.......

बाहर प्रेमी तरस रहा है,

अन्दर ठाकुर सिसक रहा है,

हर्ष कहाँ तू खिसक रहा है,

जीव ब्रम्ह को मिलने दे क्यों,

जीव ब्रम्ह को मिलने दे क्यों,

व्यर्थ बना दीवार,

पुजारी, खोल जरा पट द्वार,

पुजारी, ख़ोल जरा पट द्वार......

पूजारी खोल जरा पट द्वार,

बंद कोठरी में बैठा है,

बंद कोठरी में बैठा मेरा,

साँवरिया सरकार,

पुजारी, खोल जरा पट द्वार,

पुजारी, ख़ोल जरा पट द्वार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।