स्वागतम आपका

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॥ पावन पाठ ॥

किस तरह से नमन मैं करूँ आपका,

स्वागतम, स्वागतम, स्वागतम, आपका.....

आप आए बड़ी उमर है आपकी,

बस अभी नाम मै लिया आपका,

किस तरह से नमन मैं करूँ आपका,

स्वागतम, स्वागतम, स्वागतम, आपका......

आपकी एक नज़र कर गई क्या असर,

मेरा दिल था मेरा हो गया आपका,

किस तरह से नमन मैं करूँ आपका,

स्वागतम, स्वागतम, स्वागतम, आपका.....

डर है मुझको ना बदनाम कर दे कहीं,

इसतरह प्यार से देखना आपका,

किस तरह से नमन मैं करूँ आपका,

स्वागतम, स्वागतम, स्वागतम, आपका.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।