कान्हा से पुराना बंधन है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वो आया था वो आएगा,

कान्हा से पुराना बंधन है,

दुःख हर्ता है सुख कर्ता है,

हाथों से सजाता जीवन है....

खामोशी को लाचारी को,

एक पल में ये समझता है,

महसूस इसको हो जाता जब,

भक्त का आंसू टपकता है,

इनको जितना समझो काम है,

हाथों से सजता जीवन है,

दुःख हर्ता है सुख कर्ता है,

हाथों से सजाता जीवन है.....

नरसी जी का मीरा जी का,

कर्मा का मान बढ़ाया है,

खुद बिक के इसने भक्तों का,

हर दम क़र्ज़ चुकाया है,

ये ही मेरा जीवन धन है,

हाथों से सजाता जीवन है,

दुःख हर्ता है सुख कर्ता है,

हाथों से सजाता जीवन है.....

दीवानो का दीवाना है,

माया का इसको ना चाव है,

प्रेमी है ये उस प्रेमी का,

रखता जो प्रेम का भाव है,

कहता मोहित इनसे हम हैं,

हाथों से सजाता जीवन है,

दुःख हर्ता है सुख कर्ता है,

हाथों से सजाता जीवन है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।