हरी नाम का प्याला पी लो रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पीना है हरी नाम का प्याला पी लो रे,

जीना है तो हरि शरण में जी लो रे....

जीवन है 2 दिन का मेला चला चली का खेला,

छूट जाएगा माल खजाना नहीं चले एक ढेला,

मूरख मनवा श्याम का प्याला पी लो रे.....

दुनिया है काजल की कोठार सोच समझ कर चलना,

लगे ना दागी तन पर कोई हरि भजन नित रहना,

हरि भजन रस नाम का प्याला पी लो रे....

माया में तु फस कर बंदे करता मेरा मेरी,

आएगा जब उसका बुलावा नहीं चलेगा तेरी,

माया के जंजाल से हटके जी लो रे....

गीतकार सुरेंद्र निषाद बिश्रामपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।