दिया बाबा ने जीवन दान

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम, श्याम,

श्याम, श्याम,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान,

खाटू वाले श्याम सुन्दर की,

यही तो है पहचान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान…….

कृपा मैं श्याम प्रभु की,

आज तुमको दिखलाऊ,

एक सच्ची घटना की,

कथा मैं गा के सुनाऊं,

जिला हापुड़ की बात है,

जिसे मैं बतलाती हूँ,

एक दम्पति के मन की,

व्यथा मैं समझाती हूँ,

उन दोनों की जान थी उनकी,

इकलौती संतान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान…..

बात डॉक्टर की सुन के,

दोनों रोने लगते हैं,

चेहरा आंसुओं से अपना,

दोनों धोने लगते हैं,

बचा लो लाल को मेरे,

ले लो धन दौलत सारे,

नहीं क्यों ठीक हो रही,

लगी कैसी बिमारी,

विनती करते हैं हम तुमसे,

बचा लो इसके प्राण,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान……….

अपने बच्चे को लेकर,

दोनों घर आ जाते हैं,

देख के बच्चे की हालत,

हाथ मल रह जाते हैं,

उनके बच्चे की हालत,

दिनों दिन बिगड़ रही थी,

उनकी आँखों के सामने,

साँसे उखड रही थी,

करे प्रार्थना, दोनों रोके,

दया करो भगवान्,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान……..

मन में उम्मीदें लेकर,

श्याम दरबार में आएं,

खड़े हैं श्याम के आगे,

नैन से नीर बहाए,

गोद में बालक लेकर,

खड़ी है उसकी माता,

हाल बेहाल लाल का,

माँ से ना देखा जाता,

कृपा कर दो, पुत्र पे मेरे,

खाटू के बाबा श्याम,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान……

बोली बच्चे की माता,

बात मेरी सुनों पुजारी,

श्याम बाबा के आगे,

बन के हम खड़े भिखारी,

श्याम जल लेकर आओ,

लाल को छींटा मारो,

श्याम बाबा से कहकर,

हमारे कष्ट निवारों,

अगर लाल मेरा ठीक हुआ ना,

दे देंगे हम जान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान…….

श्याम जल लेकर के वो,

लौट घर वापस आये,

दोनों की आखों से सांसु,

अभी तक रुक ना पाए,

श्याम जल आँखों पे उसके,

माता लगा रही है,

उठो तुम आँखे खोलो,

लाल को जगा रही है,

बेहोशी की हालत में है,

बालक वो नादान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान………

आँख बच्चे ने खोली,

होश में आ गया बेटा,

उठ कर वह बैठ गया था,

अभी तक था जो लेता,

झट से माँ बाप ने उसको,

उठा के गले लगाया,

जुबा पे नाम वही फिर,

श्याम बाबा का आया,

मुरझाये चेहरों पे उनकी,

आ गई थी मुस्कान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान………

फिर से बच्चे को अपने,

जाके डॉक्टर को दिखाए,

देख के उस बालक को,

सभी का सर चकराए,

उनसे डॉक्टर ने पूछा,

ये कैसे ठीक हुआ है,

जरा हम भी तो देखें,

के वो कैसी दवा है,

श्याम जल को देख के डॉक्टर,

हुआ बड़ा हैरान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया मेरे श्याम ने जीवन दान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया श्री श्याम ने जीवन दान…….

श्याम जल बनी दवाई,

कट गई हर बिमारी,

देख लो डॉक्टर साहब,

श्याम जी की दातारी,

हारे का जो है सहारा,

वही है वैद्य हमारा,

श्याम की शरण जो आया,

कभी ना फिर वो हारा,

कथा लिखे सुखदेव अंजना,

कथा लिखे सुखदेव अंजना,

करती है गुणगान,

दिया बाबा ने जीवन दान,

दिया मेरे श्याम ने जीवन दान,

दिया बाबा ने जीवन दान……….

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प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।