मेरी डूबी कश्ती को सहारा ना मिलता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम, श्याम,

मेरी डूबी कश्ती को,

सहारा ना मिलता,

अगर श्याम तेरा,

सहारा ना मिलता,

मुझको ये जीवन,

दुबारा ना मिलता,

अगर श्याम तेरा,

सहारा ना मिलता…...

जमाने में मेरा,

ठिकाना नहीं था,

मेरे जीने का कोई,

बहाना नहीं था,

फिर दरबदर,

चैन कहीं भी ना पाया,

मेरे दिल ने धोखा,

धोखा ही खाया,

तुझे धोकों का ये,

मारा ना मिलता,

अगर श्याम तेरा,

सहारा ना मिलता......

किसे दिल की बातें मैं,

अपनी सुनाता,

जख्म अपने दिल के,

किसे मैं दिखाता,

जिसे मैंने अपने,

दिल की सुनाई,

उसी ने हँसी मेरी,

श्याम उड़ाई,

मुझे जिंदगी का,

गुजारा ना मिलता,

अगर श्याम तेरा,

सहारा ना मिलता......

सभी से भरोसा,

मेरा उठ गया था,

शर्मा को बाबा,

यूँ लग रहा था,

नहीं है ये दुनिया,

जीने के काबिल,

अगर तेरी चोखट जो,

ना होती हासिल,

तुझे दुनिया का ये,

हारा ना मिलता,

अगर श्याम तेरा,

सहारा ना मिलता……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।