शिव मेरे हो गए

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हर हर हर हर शम्भू हर हर हर हर,

हर हर हर हर शम्भू हर हर हर हर....

शिव मेरे हो गए मैं शिव का हो गया,

पाप पुण्य से परे मैं शिव में खो गया,

आकाश शिव धरा है शिव,

हर जगह है शिव सारे जहाँ में शिव,

जला शिव की ज्योत्रि ह्रदय कैलाशी हो गया,

शिव मेरे हो गए मैं शिव का हो गया,

पाप पुण्य से परे मैं शिव में खो गया,

हर हर हर हर शम्भू......

लोभ छूटा जबसे मेरा मोह छूटा सबसे मेरा,

जबसे शिव को निहारा हुआ जीवन धन्य मेरा,

सूर्य है शिव चन्द्रमा है शिव,

जल भी है शिव हवा भी शिव,

धुप भी शिव अन्न भी है शिव,

जन्म है शिव मृत्यु है शिव,

देख आदित्य तुम्हे मैं तो तुझमे खो गया,

शिव मेरे हो गए मैं शिव का हो गया,

पाप पुण्य से परे मैं शिव में खो गया,

हर हर हर हर शम्भू........

तुम उमापति हो शंकर,

तुम रूद्र रूप हो शंकर,

तुम कैलाश के स्वामी,

तुम महाकालेश्वर शंकरा,

पर्वत में शिव वन में है शिव,

हर घर के बाहर घर में है शिव,

ब्रह्मा भी शिव विष्णु भी शिव,

हर दिल की धड़कन में है शिव,

दूर मैं दुनियादारी से लीन शिव में हो गया,

शिव मेरे हो गए मैं शिव का हो गया,

पाप पुण्य से परे मैं शिव में खो गया,

हर हर हर हर शम्भू........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।