लहरे चुनरी मैया की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय मां...

लहरे चुनरी मैया की लाली लाली,

सारे जग में छाए खुशहाली,

दुर्गा माता की शान निराली,

सारी सृष्टि है मां की पुजारी,

बोलो अम्बे मां, जय जय मां जय जय मां,

जय जगदम्बे मां, जय जय मां जय जय मां....

मां के भवन के अजब नज़ारे,

रहमत की जहां बरसे फुहारे,

इस बगिया की मैया रखवाली,

मां की ममता से महके फुलवारी,

लहरे चुनरी मैया ले लाली लाली,

सारे जग में छाए खुशहाली ,

बोलो अम्बे मां, जय जय मां जय जय मां,

जय जगदम्बे मां, जय जय मां जय जय मां.....

प्रेम का सागर, ह्रदय समाये,

नैनो से करूणा, मां छलकाए,

मां ने सबकी ही बिगड़ी संवारी,

गूंजे खुशियों की हर पल किलकारी,

लहरे चुनरी मैया की लाली लाली,

सारे जग में छाए खुशहाली,

बोलो अम्बे मां, जय जय मां जय जय मां,

जय जगदम्बे मां, जय जय मां जय जय मां.....

चंदा तारे, नज़र उतारे,

सूरज मां के, चरण पखारे,

भव से नैया मैया ने ही तारी,

कीर्ति है मां दासी तुम्हारी,

लहरे चुनरी मैया एक लाली लाली,

सारे जग में छाए खुशहाली,

बोलो अम्बे मां, जय जय मां जय जय मां,

जय जगदम्बे मां, जय जय मां जय जय मां......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।