मुझ पातक का हो ऐसे उद्धार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हो जाऊँ मैं उस राह की कंकर,

जिससे गुजरे मेरे भोले शंकर,

मुझे रौंद कर भक्त सब पहुंचें,

काशी नगरी शिव के द्वार,

मुझ पातक का हो ऐसे उद्धार,

शोभित करे जो प्रभु चरणों को,

हो जाऊँ पत्र दल उस सुमन का,

या छू आऊँ मैं उस पुष्प को,

बनके भ्रमर उस उपवन का,

चरण पघारे जो भोले नाथ के,

हो जाऊँ मैं जल की वो धार,

मुझ पातक का हो ऐसे उद्धार,

चरण नवाऊँ शीश सदा मैं,

करें विनती महादेव मेरी स्वीकार,

जगत पिता जगत नाथ वहीं हैं,

करें मुझ पातक का उद्धार,

करें राजीव का उद्धार ॥

©राजीव त्यागी

नजफगढ़ नई दिल्ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।