तेरी पूजा करू दिन रात

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी पूजा करू दिन रात,

माँ अम्बे तेरी पूजा करू दिन रात,

जीवन की हर डगर पे हरदम रहना मेरे साथ,

तेरी पूजा करू दिन रात,

माँ अम्बे तेरी पूजा करू दिन रात....

सौ बार चाहे मेरी आस्था परखना,

लाल लाल चुनरी की छाया भी ना रखना,

लाल लाल चुनरी की छाया भी ना रखना,

लाल लाल चुनरी की छाया भी ना रखना,

मै जो जपती माला तेरे नाम की,

मेरे लिऐ यात्रा है वही चारो धाम की,

मेरे लिऐ यात्रा है वही चारो धाम की,

मेरे लिऐ यात्रा है वही चारो धाम की,

चरण तुम्हारे छोङु ना चाहे,

चरण तुम्हारे छोङु ना चाहे कैसे हो हालात,

तेरी पूजा करू दिन रात,

माँ अम्बे तेरी पूजा करू दिन रात....

मुझे तेरी ममता से पुरा विश्वास माँ,

डोलने ना दोगी कभी मेरा विश्वास माँ,

डोलने ना दोगी कभी मेरा विश्वास माँ,

डोलने ना दोगी कभी मेरा विश्वास माँ,

मेरे रोम रोम में रमी तू ही रहना,

मैने तेरी ममता की गरिमा में रह ना,

मैने तेरी ममता की गरिमा में रहना,

मैने तेरी ममता की गरिमा में रहना,

संकट की कभी आये जो घड़िया,

संकट की कभी आये जो घड़िया थामना मेरा हाथ,

माँ तेरी पूजा करू दिन रात,

माँ अम्बे तेरी पूजा करू दिन रात.....

तेरे ही ध्यान मे खोये जो तेरा भक्त माँ,

बाल भी ना बांका उन भक्त का होये माँ,

बाल भी ना बांका उन भक्त का होये माँ,

बाल भी ना बांका उन भक्त का होये माँ,

तू है दयावान मुझे जरा भी नी शक माँ,

कष्ट भी आने ना दोगी कभी मेरे तक माँ,

कष्ट भी आने ना दोगी कभी मेरे तक माँ,

कष्ट भी आने ना दोगी कभी मेरे तक माँ,

तेरे सिवा तेरे भक्तो की,

तेरे सिवा तेरे भक्तो की, कोई ना समझे बात,

माँ तेरी पूजा करू दिन रात,

माँ अम्बे तेरी पूजा करू दिन रात.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।