ईक तारा ईक रुकमन दोनो ही माँ की पुजारन

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ईक तारा ईक रुकमन दोनो ही माँ की पुजारन,,

अन्तर क्या दोनो ही बहनो मे बोलो,

ईक राजकुमारी ईक भाग्य की मारी,

ईक राजकुमारी ईक भाग्य की मारी,

ईक तारा ईक रुकमन दोनो ही माँ की पुजारन.....

ईक जब पैदा हुई तो घर घर बजने लगी शहनाई,

बजने लगी शहनाई माँ बजने लगी शहनाई,

ईक जब पैदा हुई तो अभागन नदिया बीच बहाई,

नदिया बीच बहाई माँ नदिया बीच बहाई,

ईक गाये ईक रोये ईक पाये ईक खोये,

अन्तर क्या दोनो ही बहनो मे बोलो,

ईक खुशी मनाये ईक ठोकरे खाये,

ईक तारा ईक रुकमन दोनो ही माँ की पुजारन......

ईक राजा संग गई ब्याई बन गई महलो की रानी,

बन गई महलो की रानी माँ बन गई महलो की रानी,

ईक कुटीया की बनी रोशनी रानी की नौकरानी,

रानी की नौकरानी माँ रानी की नौकरानी,

ईक रानी ईक दासी दोनो ही अात्मा प्यासी,

अन्तर क्या दोनो ही बहनो मे बोलो,

ईक जगन रचाये ईक वचन निभाये,

ईक तारा ईक रुकमन दोनो ही माँ की पुजारन.....

तारा रानी की कथा का भक्तो सार यही है,

ऊँच नीच का भेद ना समझे सच्चा प्यार वही है,

सच्चा प्यार वही है भक्तो सच्चा प्यार वही है,

तारा की अमर कहानी युँ तो है सदीयो पुरानी,

अन्तर क्या दोनो ही कथा मे बोलो,

ईक चचंल ने गाई ईक सन्तो ने सुनाई,

ईक तारा ईक रुकमन दोनो ही माँ की पुजारन......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।