लाज मेरी कौन बचावेगा

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॥ पावन पाठ ॥

हो तेरे बिन मेरे दादा देव , लाज मेरी कौन बचावेगा,

कौन बचावेगा लाज मेरी कौन बचावेगा हो तेरे बिन मेरे दादा देव ॥

मै हूँ दादा इक दुखियारा, तेरे नाम का मने सहारा ॥

मै तो रटता तेरी माला, पार मने तु लगावेगा ॥

हो तेरे बिन मेरे दादा देव.....

ना मै चाहूँ बगला कोटी, ना मने चाहिए हीरे मोती ॥

तेरे चरणा की धूल, सदा यो सेवक चहावेगा ॥

हो तेरे बिन मेरे दादा देव.........

ना कोई संगी ना कोई साथी, मै तेरा दीपक तू मेरी बाती ॥

दे सच्चा बिसवास, मने तु राहा दिखावेगा ॥

हो तेरे बिन मेरे दादा देव..........

ना मैं जानु पूजा अर्चन, देव करूं क्या तुझ को अर्पण॥

भूलण संग हरीश सदा गुण तेरे गावेगा ॥

हो तेरे बिन मेरे दादा देव......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।