जय माता दी कहन्दा कहन्दा तेरे दर तक आया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय माता दी कहन्दा कहन्दा तेरे दर तक आया,

ना पल्ले गुण कोई मेरे मैं ता औगण लै के आया,

दुनिया मंगे लख करोड़ा ओ मैनु मिल जाये तेरी छाया,

मैनु मिल जाये तेरी छाया....

हुण लग्न लगी की करिए,

हर पल तेरा नाम सिमरिए,

तेरे ध्यान दे विच मन वसेया रवे,

कोई होर ध्यान ना धरीए,

हुण लग्न लगी की करिए....

बड़ीयां उड़ीका बाद मैया जी तेरा बुलावा आया,

लख लख शुक्र तेरा जो मैनु अपनी चरणी लाया,

दयो सहारा माँ जगदम्बे,

देयो सहारा माँ जगदम्बे था-था असी ना रुलिये,

हुण लग्न लगी की करिए...

दर तेरे नु छड्ड के मैया होर केड़े दर जावां,

जे तू ही ना सुने ते दिल दा हाल मैं किस नु सुनावा,

दर-दर रुलेया मैया दस हुण,

दर-दर रुलेया मैया दस हुण केड़ा पल्ला फड़ीए,

हुण लग्न लगी की करिए....

जो भी मिलेया रहमत तेरी मैं कुछ होर ना मंगा,

तन-मन अपना दाती तेरे नाम दे रंग विच रंगा,

जे तू मेहर करे ते मायें,

जे तू मेहर करे ते मायें भवसागर विचो तरीए,

हुण लग्न लगी की करिए.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।