गज रूप निराला है

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गज रूप निराला है,

विघ्नों को टाला है,

देकर सहारा तुमने,

सारे जग को सम्भाला है,

गज रूप निराला है....

रिद्धि सिद्धि विनायक हो,

स्वामी तुम सुखदायक हो,

कष्टों से तुमने अपने,

भक्तों को निकाला है,

गज रूप निराला है.....

जब भंवर पड़ी नैया,

तुम बने तब खिवैया,

दीन बंधु कृपा सिंधु,

मेरा बड़ा कृपाला है,

गज रूप निराला है....

श्रेष्ठ बुद्धि तुमको हासिल,

प्रथम पूजा के काबिल,

अंधकार मिटाकर तुमने,

किया जग में उजाला है,

गज रूप निराला है.....

सबसे आला है,

विघ्नहर्ता तुमने,

सबके कष्टों को टाला है,

राजीव के कष्टों को टाला है,

देकर सहारा तुमने,

सारे जग को सम्भाला है.....

©राजीव त्यागी नजफगढ़ नई दिल्ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।