भावना की ज्योत को जगा के देखिए-वैष्णों दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भावना की ज्योत को, जगा के देखिए ll

कि बोलती है मूर्ती, बुला के देखिए l

सौ बार चाहे, आज़मा के देखिए l

कि बोलती है मूर्ती, बुला के देखिए ll

भावना की ज्योत को,,,,,,,,,,,,,,,,,,

करोगे जो सवाल, तो जवाब मिलेगा l

यहाँ पुण्य पाप का, हिसाब मिलेगा l

भले बुरे सब की, वो जानती हैं माँ,

"खरी खोटी सब की, वो जानती है माँ" l

श्रद्धा से सर को, झुका के देखिए ll

कि बोलती है मूर्ती, बुला के देखिए ll

भावना की ज्योत को,,,,,,,,,,,,,,,,,,

छाया में है छुपी, वो बैठी है धूप में l

माँ का मिलता है दर्शन, किसी भी रूप में l

होगा हर जगह पे, विश्वास मईया का,

"तेरे विश्वास में है, वास मईया का" l

जिस और नज़रें, घुमा के देखिये ll

कि बोलती है मूर्ती, बुला के देखिए ll

भावना की ज्योत को,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मिटाकर तूँ खुदी, माँ को धिया कर देख ले l

चली आएगी दौड़ी, बुला के देख ले l

हो बनिये जब था, बुलाया प्यार से*,

"मईया ने बचाया था, मंझधार से" l

हस्ती को अपनी, मिटा के देखिए ll

कि बोलती है मूर्ती, बुला के देखिए ll

भावना की ज्योत को,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।