दर पे मनाऊंगी जन्मदिन

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दर पे मनाऊंगी जन्मदिन दर पे मनाऊंगी,

दर पे मनाऊंगी जन्मदिन दर पे मनाऊंगी,

ज्योत जगा के महारानी का दर्शन पाऊंगी,

ज्योत जगा के महारानी का दर्शन पाऊंगी,

दर पे मनाऊंगी जन्मदिन दर पे मनाऊंगी......

शेरोंवाली मैयारानी सबके काज सवारे,

सब भगतो को मैया रानी भव से पार उतारे,

अपने दिल का सारा हाल माँ को बताऊंगी,

दर पे मनाऊंगी जन्मदिन दर पे मनाऊंगी...

माँ के नाम की ज्योत मैं भगतो सच्चे मन से जगाउँगी,

लाल रंग की चुनरी मैयारानी को ओढ़ाउंगी,

मैं लाल रंग का चूड़ा मैया को पहनाऊँगी,

दर पे मनाऊंगी जन्मदिन दर पे मनाऊंगी....

खुशियां का ये दिन है आया माँ को भेंटे सुनाऊंगी,

अपना जन्मदिन शेरोंवाली माँ के नाम लिखवाऊंगी,

हलवा पुरी और चने का माँ को भोग लगाऊंगी,

दर पे मनाऊंगी जन्मदिन दर पे मनाऊंगी.....

ऐसी भक्ति दे दो मैया मुझको शाम सवेरे,

खुशियों से दामन को भर दो मिट जाए घोर अंधेरे,

चढ़ जाए तेरे नाम की मस्ती तेरे ही गुण गाऊंगी,

दर पे मनाऊंगी जन्मदिन दर पे मनाऊंगी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।