नित बेड़े तू करोड़ा दे तारनी ए

पारंपरिक
माता दुर्गा गुरु वाणी दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नित बेड़े तू करोड़ा दे तारनी ए, साडा वी माँ हाल पुछ लै,

नित बेड़े तू करोड़ा दे तारनी ए, साडा वी माँ हाल पुछ लै,

काज बिगड़े तू सबदे सवारदी ए, साडा वी माँ हाल पुछ लै,

नित बेड़े तू करोड़ा दे......

तुहियों दस कर्मा दे मारे किथे जाणगे,

चंगेया नु तारेंगी ते मंदे किथे जाणगे,

तुहियों दस कर्मा दे मारे किथे जाणगे,

चंगेया नु तारेंगी ते मंदे किथे जाणगे,

रोज दुखियां दे कष्ट निवार दी ए,

रोज दुखियां दे कष्ट निवार दी ए,

साडा वी माँ हाल पुछ लै, नित बेड़े तू करोड़ा दे......

गम जदो पैण पल्ले खुशी लूट जांदी ए,

ऐवे ही भरोसे दी माँ तार टूट जांदी ए,

कम जदो पैण पल्ले खुशी लूट जांदी ए,

ऐवे ही भरोसे दी माँ तार टूट जांदी ए,

ऐवे ही भरोसे दी माँ तार टूट जांदी ए,

अपने भगता नु अवाजा तू मारनी ए,

साडा वी माँ हाल पुछ लै, नित बेड़े तू करोड़ा दे......

जिवें पानी बिना हुँदा मछली दा हाल माँ,

तेरी मेहर बिना साडा जीना मुहाल माँ,

जिवें पानी बिना हुँदा मछली दा हाल माँ,

तेरी मेहर बिना साडा जीना मुहाल माँ,

तेरी मेहर बिना साडा जीना मुहाल माँ,

अपने भगता दी राह निहारदी ए,

साडा वी माँ हाल पुछ लै, नित बेड़े तू करोड़ा दे......

थोड़ा जेहा सुख सानु दे दे तू उधार माँ,

अपना तू निर्दोष प्यार बेशुमार माँ,

थोड़ा जेहा सुख सानु दे दे तू उधार माँ,

अपना तू निर्दोष प्यार बेशुमार माँ,

अपना तू निर्दोष प्यार बेशुमार माँ,

पांड पापीए दी तू सिर तो उतारनी ए,

साडा वी माँ हाल पुछ लै, नित बेड़े तू करोड़ा दे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।