आये तेरे भवन देदे अपनी शरण

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आये तेरे भवन, देदे अपनी शरण,

रहे तुझ में मगन, थाम के यह चरण ।

तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥

उत्सव मनाये, नाचे गाये,

चलो मैया के दर जाएँ ।

चारो दिशाए चार खम्बे बनी हैं,

मंडप में आत्मा की चारद तानी है ।

सूरज भी किरणों की माला ले आया,

कुदरत ने धरती का आँगन सजाया ।

करके तेरे दर्शन, झूमे धरती पवन,

सन नन नन गाये पवन, सभी तुझ में मगन,

तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥

फूलों ने रंगों से रंगोली सजाई,

सारी धरती यह महकायी ।

चरणों में बहती है गंगा की धरा,

आरती का दीपक लगे हर एक सितारा ।

पुरवैया देखो चवर कैसे झुलाए,

ऋतुएँ भी माता का झुला झुलायें ।

पा के भक्ति का धन, हुआ पावन यह मन,

कर के तेरा सुमिरन, खुले अंतर नयन,

तन मन में भक्ति ज्योति तेरी, हे माता जलती रहे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।