अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे, तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे, तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे....

हमारे लिए क्यों देर किए हो हमारे लिए क्यों देर किए हो,

पापी अनेकों हैं, पल में उबारे,

पतितों को पावन हो करती कृपानिधि पतितो को पावन हो करती कृपानिधि,

किए पाप है इस, सुयश के सहारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे....

ये माना अधम हैं अपावन कुटिल हैं ये माना अधम हैं अपावन कुटिल हैं,

सब कुछ हैं लेकिन हैं, फिर भी तुम्हारे ये मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से,

ये मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से इसे शुद्ध करने में, हम भक्त हारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे....

अशरण शरण और अधम उधारण अशरण शरण और अधम उधारण,

क्या ये नहीं माँ, विरध तुम्हारे हमें दीनबंधु माँ ह्रदय से लगा लो,

हमें दीनबंधु माँ ह्रदय से लगा लो पड़े दीन हैं हम, दर पे तुम्हारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे....

भले या बुरे हों कैसे हों लेकिन भले या बुरे हों कैसे हों लेकिन,

निज जन तो हैं तुमको, प्राणों से प्यारे कामी कुटिल जन पतित अधम हम,

कामी कुटिल जन पतित अधम हम जैसे भी हैं माँ, तेरे दुलारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे,

अगर मैया देखोगी अवगुण हमारे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।