तू दाती माँ दाता वंडे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू दाती माँ दाता वंडे तेरे चरणी खड़ा सवाली,

खाली साहवां माँ मैं लैके आया,

नी माँ मेरा हजे वी पलड़ा खाली,

नी माँ मेरा हजे वी पलड़ा खाली...

शेरावाली माँ मेरी ज्योतावाली माँ,

शेरावाली माँ मेरी ज्योतावाली माँ,

ममता दी करी इस बच्चड़े ते छाँ,

तेरे दर आंवा आ के सिर नु झुकांवा,

दे दे प्यार दातीऐ,

कोई ना किनारा ईक तेरा ही सहारा,

मैनु भवनां च रख सेवादार दातीऐ,

भवनां च रख सेवादार दातीऐ,

शेरावाली माँ मेरी ज्योतावाली माँ.....

दातीऐ मै नाम तेरे रगं विच रगंना,

सिर ऊते हत्थ होवे होर नहीयों मगंना,

सिर ऊते हत्थ होवे होर नहीयों मगंना,

मै टुट गया सारा जिंवे अम्बरां च तारा,

ला दे पार दातीऐ,

कोई ना किनारा ईक तेरा ही सहारा,

मैनु भवनां च रख सेवादार दातीऐ,

भवनां च रख सेवादार दातीऐ,

शेरावाली माँ मेरी ज्योतावाली माँ.....

भवना च रखकर देवी उपकार माँ,

अँख विचो ना हंजु आवे ऐनां देवीं प्यार माँ,

अँख विचो ना हंजु आवे ऐनां देवीं प्यार माँ,

जग वेख लया सारा माँये वेखणा नजारा,

लै जा द्वार दातीऐ,

कोई ना किनारा ईक तेरा ही सहारा,

मैनु भवनां च रख सेवादार दातीऐ,

भवनां च रख सेवादार दातीऐ,

शेरावाली माँ मेरी ज्योतावाली माँ.....

असां तेरे चरणीं प्रीता पाईया सच्चीयां,

करदे उडी़का माँये थक गईयाँ अखीआं,

करदे उडी़का माँये थक गईया अखीआं,

देदे प्यार दा हुलारा तेरा लाल मैं प्यारा,

ना विसार दातीऐ,

कोई ना किनारा ईक तेरा ही सहारा,

मैनु भवनां च रख सेवादार दातीऐ,

भवनां च रख सेवादार दातीऐ,

शेरावाली माँ मेरी ज्योतावाली माँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।