दो पंख दिए होते माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दो पंख दिए होते माँ, दो पंख दिए होते,

तो उड़ के आता तेरे दरबार माँ,

तेरे चरणों में गिर के मैं लेता जन्म सुधार माँ,

दो पंख दिए होते माँ... दो पंख दिए होते,

दो पंख दिए होते....

तेरी ज्योत की किरणों से अंधकार मेरा मिटता,

तेरी भक्ति की गंगा में मन दर्पण ये खिलता,

जय जय माँ जय जय माँ,

जय जय माँ जय जय माँ,

इन प्यासे नैनो से माँ, इन प्यासे नैनो से,

मैं जी भर करता तेरा दीदार माँ,

तेरे चरणों में गिर के मैं लेता जन्म सुधार माँ,

दो पंख दिए होते माँ.... दो पंख दिए होते,

दो पंख दिए होते......

कुछ अपनी कह लेता कुछ तेरी सुन लेता,

तेरी दया के मोती माँ नसमस्तक चुन लेता,

जय जय माँ जय जय माँ,

जय जय माँ जय जय माँ,

इस जीवन को मिलता माँ,

इस जीवन को मिलता तेरा खुशियों का संसार माँ,

तेरे चरणों में गिर के मैं लेता जन्म सुधार माँ,

दो पंख दिए होते माँ... दो पंख दिए होते,

दो पंख दिए होते....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।