कण कण में ॐ समाया है

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

कण कण में ॐ समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है,

प्रभु कैसी तुम्हारी माया है,

कभी गणपति में ओम कभी गौरा में ओम,

रिद्धि सिद्धि में ओम समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है,

कण कण में ॐ समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है.....

कभी ब्रह्मा में ओम कभी विष्णु में ओम,

कभी भोले में ओम समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है,

कण कण में ॐ समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है.....

कभी गंगा में ओम कभी जमुना में ओम,

कभी लहरों में ओम समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है,

कण कण में ॐ समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है....

कभी राम में ओम कभी श्याम में ओम,

हनुमत में ओम समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है,

कण कण में ॐ समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है.....

कभी सूरज में ओम भी चंदा में ओम,

तारों में ओम समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है,

कण कण में ॐ समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है....

कभी गीता में ओम कभी भागवत में ओम,

कभी वेदों में ओम समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है,

कण कण में ॐ समाया है प्रभु कैसी तुम्हारी माया है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।