॥ पावन पाठ ॥
हाथ जोड़कर के विनती करता,
धरता प्रभु का ध्यान,
चरणों का दास माता,
नाम मेरा हनुमान,
चरणों का दास माता,
नाम मेरा हनूमान......
ईष्ट देव मेरे दशरथ नंदन,
राम नाम का प्यारा,
रोम रोम में बसा हुआ,
कौशल्या राज दुलारा,
अवधपुरी का सितारा मेरा,
अवधपुरी की शान,
चरणों का दास माता,
नाम मेरा हनूमान......
माया से नही बनी अंगूठी,
बनी अवध के धाम की,
जनक नंदनी लेकर आया,
आज निशानी राम की,
मेरे प्रभु श्री राम की तू,
कर ले माँ पहचान,
चरणों का दास माता,
नाम मेरा हनूमान......
ब्रह्मरूप वनवासी योगी,
मुनियो के हितकारी,
रक्षा करी थी यज्ञ की जाकर,
मारे दुष्टाचारी,
अहिल्या पार उतारी नारी,
बनकर करुणा निधान,
चरणों का दास माता,
नाम मेरा हनूमान......