बाबा करले तू इत्थे भी नज़र

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बाबा करले तू इत्थे भी नज़र

ओ ओ ओ ओ..

बाबा करले तू इत्थे भी नज़र

भगत कोई रोता होवेंगा..

बाबा करले तू इत्थे भी नज़र

भगत कोई रोता होवेंगा.....

आया होगा हार के वो

हर डगर ओ ओ..

आया होगा हार के वो

हर डगर.....

भगत कोई रोता होवेगा

बाबा करले तू इत्थे भी नज़र

भगत कोई रोता होवेंगा

भगत कोई रोता होवेगा.....

तेरी दुनिया में नहीं आता

बाबा कोई काम हैं हाँ

कहते है खाटू विच्च

मिलता आराम है.....

कहते है खाटू विच्च

मिलता आराम है.....

तेरी दुनिया में नहीं आता

बाबा कोई काम हैं

कहते है खाटू विच्च

मिलता आराम है.....

कहते है खाटू विच्च

मिलता आराम है......

ये ही आस ले के..

ये ही आस ले

आया हूँ तेरे दर

ये ही आस ले

आया हूँ तेरे दर.....

भगत कोई रोता होवेगा

बाबा करले तू इत्थे भी नज़र

भगत कोई रोता होवेंगा

भगत कोई रोता होवेगा.....

मैं भी हार के आया था बाबा

कभी तेरे द्वार पे हाँ

सर पे रखा था मेरे

हाथ तूने प्यार से.....

सर पे रखा था मेरे

हाथ तूने प्यार से.....

मैं भी हार के आया था बाबा

कभी तेरे द्वार पे

सर पे रखा था मेरे

हाथ तूने प्यार से..

सर पे रखा था मेरे

हाथ तूने प्यार से......

थोड़ी इन पे भी..

थोड़ी इन पे भी

कर दे मेहर

थोड़ी इन पे भी

कर दे मेहर.....

भगत कोई रोता होवेगा

बाबा करले तू इत्थे भी नज़र

भगत कोई रोता होवेंगा

भगत कोई रोता होवेगा.....

मेरी बिगड़ी बनायी

अब इनकी बनानी है हाँ

यू हीं नहीं बाबा तेरी

दुनियाँ दीवानी है.....

यू हीं नहीं बाबा तेरी

दुनियाँ दीवानी है....

मेरी बिगड़ी बनायी

अब इनकी बनानी है

यू हीं नहीं बाबा तेरी

दुनियाँ दीवानी है..

यू हीं नहीं बाबा तेरी

दुनियाँ दीवानी है....

तुझे लेनी होगी..

तुझे लेनी होगी

इनकी भी खबर

तुझे लेनी होगी

इनकी भी खबर.....

भगत कोई रोता होवेगा

बाबा करले तू इत्थे भी नज़र

भगत कोई रोता होवेंगा

भगत कोई रोता होवेगा.....

तेरी पड़ेगी नजर

दुनियाँ फेरेगी नज़र हाँ

तेरी ही कृपा का बाबा

होवेगा असर.....

तेरी ही कृपा का बाबा

होवेगा असर..

तेरी पड़ेगी नजर

दुनियाँ फेरेगी नज़र

तेरी ही कृपा का बाबा

होवेगा असर..

तेरी ही कृपा का बाबा

होवेगा असर..

गाने लगेगा वो..

गाने लगेगा वो

झूम झूम कर

गानें लगेगा वो

झूम झूम कर......

भगत कोई रोता होवेगा..

तेरे दर जो आयेगा हार कर

भक्त ना फिर वो रोता मिलेगा

तेरे दर जो आयेगा हार कर

भक्त ना फिर वो रोता मिलेगा....

भक्त ना फिर वो रोता मिलेगा

भक्त ना फिर वो रोता मिलेगा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।