हरी के भजन में ना जावे मेरी बुढ़िया

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

हरी के भजन में ना जावे मेरी बुढ़िया....

मैंने कहा कि मम्मी गीता पढ़ लेना,

सिर में दर्द बतावे मेरी बुढ़िया,

हरी के भजन में ना जावे मेरी बुढ़िया.....

मैंने कहा कि मम्मी सुमरण कर लो,

आंखो में दर्द बतावे मेरी बुढ़िया,

हरी के भजन में ना जावे मेरी बुढ़िया.....

मैंने कहा कि मम्मी दान करलो,

हाथो में दर्द बतावे मेरी बुढ़िया,

हरी के भजन में ना जावे मेरी बुढ़िया......

मैंने कहा कि मम्मी सत्संग चली जाओ,

पैरों में दर्द बतावे मेरी बुढ़िया,

हरी के भजन में ना जावे मेरी बुढ़िया......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।