घनश्याम मिलेंगे कहीं न कहीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे छोटे से मन में लगन लगी,

भगवान मिलेंगे कहीं न कहीं,

घनश्याम मिलेंगे कहीं न कहीं.....

फूलों में मिलें कांटों में मिले,

कलियों में मिलेंगे कहीं न कहीं,

भगवान मिलेंगे कहीं न कहीं,

घनश्याम मिलेंगे कहीं न कहीं.....

गंगा में मिलें यमुना में मिलें,

सरयू में मिलेंगे कहीं न कहीं,

भगवान मिलेंगे कहीं न कहीं,

घनश्याम मिलेंगे कहीं न कहीं.....

चंदा में मिलें सूरज में मिलें,

तारों में मिलेंगे कहीं न कहीं,

भगवान मिलेंगे कहीं न कहीं,

घनश्याम मिलेंगे कहीं न कहीं.....

गीता में मिलें भागवत में मिले,

रामायण में मिलेंगे कहीं न कहीं,

भगवान मिलेंगे कहीं न कहीं,

घनश्याम मिलेंगे कहीं न कहीं.....

बच्चों में मिलें बूढ़ों में मिलें,

संतों में मिलेंगे कहीं न कहीं,

भगवान मिलेंगे कहीं न कहीं,

घनश्याम मिलेंगे कहीं न कहीं.....

मंदिर में मिलें कीर्तन में मिलें,

भक्तों में मिलेंगे कहीं न कहीं,

भगवान मिलेंगे कहीं न कहीं,

घनश्याम मिलेंगे कहीं न कहीं.....

"मधुर भजन बेला"

Shweta Pandey (Varanasi)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।